पति के साथ पूरे मायके का कत्ल… आज कोई बेल बॉन्ड भरने वाला भी नहीं

हिसार | रेलू राम पूनिया हत्याकांड… ऐसी वारदात जो 24 साल बाद आज भी पूरे हरियाणा के जेहन में जिंदा है. एक बेटी ने अपने पूरे मायके का कत्ल कर दिया था. अपने पति के साथ मिलकर. कुल 8 हत्याएं की थीं. बेटी का नाम है सोनिया और दामाद है संजीव. कभी निचली अदालत और सुप्रीम कोर्ट ने इन्हें फांसी की सजा सुनाई थी. लेकिन, अमल में सिस्टम सुस्त रहा. इन्हीं ढिलाइयों का फायदा उठाकर इन्होंने पहले फांसी की सजा को उम्रकैद में बदलवाया और अब समयपूर्व रिहाई का भी लाभ लेने जा रहे हैं. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट इन्हें अंतरिम जमानत मंजूर कर चुका है.

सास ने नहीं भरा बेल बॉन्ड

लेकिन, सोनिया ने जिस पति संजीव के साथ मिलकर माता-पिता, भाई-भाभी, बहन, भतीजे-भतीजियों सहित कुल आठ लोगों की हत्या की थी, आज वो पति भी उसके साथ नहीं है. हाई कोर्ट से अं तरिम जमानत के बाद संजीव की मां ने बहू सोनिया के लिए बेल बॉन्ड तक नहीं भरा. संजीव के लिए उसकी मां राजबीरी देवी और चाचा राजेंद्र ने एक-एक लाख रुपए के बेल बॉन्ड हिसार की अदालत में दिए. हिसार के बाद उत्तर प्रदेश की अदालत से रिलीज ऑर्डर जारी होने के बाद शनिवार शाम संजीव करनाल जेल से रिहा हो गया. राजबीरी देवी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की रहने वाली हैं.

जेल में मिला परिवार भर सकता है बेल बॉन्ड

सोनिया के लिए बेल बॉन्ड न तो संजीव का परिवार और न ही उसके चाचा व चचेरे भाई-बहन देंगे. बताया जा रहा है कि करनाल का एक परिवार सोनिया के लिए बेल बॉन्ड दे सकता है. इस परिवार से सोनिया की जान-पहचान जेल में हुई थी. उम्मीद जताई जा रही है कि सोनिया के लिए सोमवार को कोई बेल बॉन्ड देने के लिए हिसार अदालत में आ सकता है.

रेलू राम के भाइयों की तरफ से पैरवी करने वाले एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के बाद रेलू राम के भाइयों के परिवार को जान का खतरा है. हालांकि, पुलिस ने रेलू राम की लितानी गांव स्थित कोठी के बाहर एक पीसीआर तैनात कर दी है. उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ शीघ्र ही सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की जाएगी.

भाई बांट चुके हैं प्रॉपर्टी

रेलू राम के पांच भाई थे. इनमें तीन की पहले ही मौत हो गई थी. एक की रेलू राम परिवार हत्याकांड के बाद मौत हो गई. अभी एक भाई राम सिंह जिंदा है. इस हत्याकांड के बाद करीब 102 एकड़ जमीन का बंटवारा रेलू राम के भाइयों के परिवार में हो चुका है. फरीदाबाद की एक 500 गज की कोठी को बेचकर उसकी राशि भी इन परिवारों ने बांट ली है. रेलू राम की कोठी उसके वारिसों के नाम हो चुकी है.

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