नई दिल्ली | कालकाजी की रिहायशी इमारत में तीसरी मंजिल पर बना 2 बीएचके फ्लैट अरसे से अजीब सी खामोशी ओढ़े था. इस खामोशी में छिपा था अकेलेपन और बढ़ती आर्थिक तंगी का दर्द. बंद घर में 52 साल की महिला और उसके दो युवा बेटों के शव मिले. पड़ोसियों और रिश्तेदारों के अनुसार, परिवार कई महीनों से लोगों से कटा हुआ था. दोनों भाइयों ने कुछ दिन पहले भी खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी.
एक बेटा इंजीनियर था, दूसरा यूपीएससी एस्पिरेंट
मृतकों की पहचान गृहिणी अनुराधा कपूर (52) और उनके दो बेटों के रूप में हुई है. बड़ा बेटा आशीष कपूर (32) नोएडा के एक निजी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका था. छोटा बेटा चैतन्य कपूर (27) संभवतः सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहा था.
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि कोर्ट का कब्जा आदेश लागू करने के लिए एक बेलिफ स्थानीय पुलिस के साथ घर पहुंचा था. बार-बार दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद डुप्लीकेट चाबी से घर खोला गया. अंदर तीनों मृत मिले. अनुराधा और आशीष एक कमरे में थे, जबकि चैतन्य दूसरे कमरे में मिला. मौके से मिला एक नोट संकेत दे रहा था कि परिवार अवसाद से जूझ रहा था और उन्होंने आत्महत्या की.
15 साल से रिश्तेदारी से संपर्क तोड़ रखा था
रिश्तेदारों के अनुसार, अनुराधा के पति संजीव कपूर का निर्माण का व्यवसाय था. उनकी मौत कुछ साल पहले कोविड से जुड़ी जटिलताओं और डायबिटीज के कारण हो गई थी. एक रिश्तेदार संजय ने बताया कि परिवार करीब 15 साल से रिश्तेदारों से अलग-थलग था. कोई संपर्क नहीं था. संजीव की मौत की जानकारी भी उन्हें काफी बाद में मिली. उन्हें यह तक नहीं पता था कि अब वे कैसे दिखते हैं.
पुलिस के अनुसार, परिवार में आत्महत्या की प्रवृत्ति पहले से थी. दोनों बेटों ने 30 अक्टूबर को आत्महत्या की कोशिश की थी. कई पड़ोसियों ने बताया कि करीब दो महीने पहले भाइयों ने खुद को मारने की कोशिश की थी. इसके बाद एंबुलेंस और पुलिस घर आई थी. परिवार किराना सामान लेने तक के लिए भी शायद ही बाहर निकलता था.
34 हजार रुपए महीना किराया, दो साल से नहीं चुकाया
बताया जा रहा है कि परिवार ने पिछले दो साल से किराया नहीं दिया था. इसी कारण मकान खाली कराने का आदेश जारी हुआ था. एक पुलिस सूत्र ने बताया कि मासिक किराया करीब 34 हजार रुपये था. मकान मालिक मुंबई में रहता है. परिवार करीब दो साल पहले यहां रहने आया था और सिर्फ पहले महीने का किराया दिया था. इसके बाद मकान मालिक ने कोर्ट का रुख किया.
कर्ज में डूबा हुआ था परिवार
जांचकर्ताओं ने बताया कि परिवार कर्ज में डूबा हुआ था. दोनों बेटे बेरोजगार थे. उन्होंने 50 से 55 लोगों से छोटे-छोटे कर्ज लिए थे. हर कर्ज 10 हजार से 30 हजार रुपये के बीच था. कुल रकम करीब 10 से 15 लाख रुपये बताई गई है।
पुलिस ने बताया कि परिवार की आखिरी बातचीत सिर्फ फोन मैसेज के जरिए हुई थी। बेटे लोगों से फोन रिचार्ज कराने, पैसे मांगने या नौकरी के बारे में पूछने के लिए मैसेज करते थे। उनके फोन में सिर्फ 10 से 15 कॉन्टैक्ट नंबर ही सेव थे।
रेड अलर्ट: ऐसे हालात के ट्रिगर पॉइंट पहले ही ऐसे समझें
अगर किसी व्यक्ति या परिवार में ये संकेत दिखें, तो सतर्क हो जाना जरूरी है:
– लंबे समय तक किसी से बात बंद कर देना
– अचानक लोगों से कट जाना
– आर्थिक तंगी छिपाना
– बार-बार मदद मांगने वाले मैसेज
– आत्महत्या या मौत की बातें करना
– घर में खुद को बंद रखना
ये सब मदद की खामोश पुकार होती हैं। समय रहते क्या किया जा सकता है…
व्यक्ति क्या करे…
– समस्या छिपाने के बजाय किसी से बात करें
– आर्थिक संकट में प्रोफेशनल काउंसलिंग लें
– बेरोजगारी को व्यक्तिगत असफलता न मानें
– परिवार और रिश्तेदारों के स्तर पर
– लंबे समय से चुप लोगों से संपर्क करें
– ठीक हो जाएगा कहकर बात टालें नहीं
– बार-बार आत्महत्या की बात को मजाक न समझें
समाज और सिस्टम क्या करें
– मानसिक स्वास्थ्य को सामान्य बातचीत का हिस्सा बनाएं
– शहरी इलाकों में काउंसलिंग और सपोर्ट सिस्टम मजबूत हों
– अकेले रह रहे परिवारों पर सामाजिक निगरानी हो